Wednesday, July 29, 2026

 राग आसावरी
Time 10 AM TO NOON  
राग आसावरी
राग आसावरी स्वयं पर नामित थाट
का एक पूर्वाह्न कालीन राग है।इसका
समग्र मिजाज़ एक उदास अथवा
गंभीर राग का है। आसावरी का
बहाव अधिक सरल है  
थाट आसावरी    
जाति  औडव - संपूर्ण   
वादी  ध
संवादी    ग 
आरोह   सा रे म प ध 
अवरोह  सा नि ध प म ग  
 पकड रे म प सा (नि ), म प ग रे सा 
Filmi song
1 lo aa gyi unki yaad vo nhi aaye.

2 vo dekho jla ghar kisi ka.

 राग पीलू / Raga Pilu 
Time 4 PM to 6 PM
राग पीलू
राग पीलू काफी थाट का गोधूलि वेला
में गाया जानेवाला राग है। पीलू
मूलभूत रूप से कई अन्य रागों की
तरह एक पूर्ण संरचित राग नहीं,
बल्कि एक धुन है। भैरवी की तरह
इसकी रचनाओं में कलाकार की
समझ के अनुसार सारे बारह स्वरों
को उपयोग किया जा सकता है।
यह भक्ति, और लोक प्रेम का राग है।
इस राग में श्रीकृष्ण के कई भजन हैं।
थाट काफी 
जाति औडव - संपूर्ण 
वादी  ग  
संवादी नि 
आरोह  ऩि सा ग॒ म प नि सां   
अवरोह सां नि सां नि॒ ध प म ग म प
 (म) ग॒ रे सा नि सा
पकड  ग॒ म ध॒ प ग॒ सा ऩि सा



Sunday, July 5, 2026

                                                                                 
दादरा ताल का परिचय

दादरा ताल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की

 एक बहुत लोकप्रिय ताल है।

 इसका प्रयोग विशेष रूप से भजन, ग़ज़ल, 

लोकगीत, ठुमरी

 और दादरा गायन में किया जाता है। 

यह ताल सरल, मधुर और 

सुरीली मानी जाती है।

दादरा ताल की विशेषताएँ

मात्राएँ (Matra): 6

विभाग (Vibhag):2

प्रत्येक विभाग में 3-3 मात्राएँ होती हैं।

सम: पहली मात्रा पर 

खाली: चौथी मात्रा पर 

दादरा ताल का ठेका

धा\ धि\ ना;|;धा\ ति\ ना

इसे इस प्रकार गिना जाता है:

1 2 3 | 4 5 6

उपयोग

दादरा ताल का प्रयोग मुख्य रूप से:

भजन ग़ज़ल ठुमरी दादरा गायन 

फिल्मी गीतलोक संगीत

में किया जाता है।

वाद्य यंत्र

इस ताल को सामान्यतः

तबला ,ढोलक ,ड्रम सेट ,ऑक्टोपैड

पर बजाया जाता है।   

             

                                                                                 

दादरा ताल पर 

 प्रसिद्ध हिंदी फिल्मी गीत 

लग जा गले — फिल्म वो कौन थी

अजी रूठ कर अब कहाँ जाइएगा — आरज़ू

तेरे मस्त मस्त दो नैन — Dabangg

नैना बरसे रिमझिम रिमझिम — वो कौन थी

चिंगारी कोई भड़के — अमर प्रेम

दिल चीज़ क्या है — उमराव जान

इन आँखों की मस्ती — उमराव जान

हमें तुमसे प्यार कितना — कुदरत

आज जाने की ज़िद न करो

(फिल्मी/ग़ज़ल शैली में लोकप्रिय) 

......... 

प्यार किया तो डरना क्या — मुगल-ए-आज़म

अजीब दास्तां है ये — दिल अपना और प्रीत पराई

तेरी आँखों के सिवा — चिराग

ये जिंदगी उसी की है — अनारकली

जब दीप जले आना — चितचोर

चौदहवीं का चाँद हो — चौदहवीं का चाँद

रसिक बलमा — चोरी चोरी

जाने क्या तूने कही — प्यासा

पिया तोसे नैना लागे रे — गाइड

तेरे बिना जिंदगी से — आंधी

कुछ दिल ने कहा — अनुपमा

दिल ढूँढता है — मौसम

न जाने क्यों होता है — छोटी सी बात

ओ सजना बरखा बहार आई — परख

मोरा गोरा अंग लै ले — बंदिनी

रैना बीती जाए — अमर प्रेम

आज फिर जीने की तमन्ना है — गाइड

आपकी नजरों ने समझा — अनपढ़

लग जा गले — वो कौन थी

नैना बरसे रिमझिम — वो कौन थी

इनमें से कई गीतों में कभी-कभी

 मिश्रित ताल प्रयोग भी मिलता है, 

लेकिन मूल प्रवाह दादरा शैली में महसूस होता है।

                                             


Wednesday, June 3, 2026

राग पुरिया धनाश्री 
Time    4 PM TO 6 PM 
राग पुरिया धनाश्री 
 राग पुरिया धनाश्री गोधूलि वेला में प्रस्तुत 
किया जाने वाला पूर्वी थाट का राग है। 
यह दरअसल दो रागों, राग पुरिया और
 राग धनाश्री का मिश्रण है। इस राग के
 भावनात्मक स्वरूप का वर्गीकरण 
मुश्किल है, क्योंकि यह एक स्वर से 
दूसरे में संक्रमण पर बदलता है।
 राग पुरिया धनाश्री के सुर की गंभीरता
उसे बहुत ही भावप्रधान राग बना देती है।
 यह धैवत, मध्यम और ऋषभ के उपयोग
 से रौद्र और भयानक बनता है, 
पर उसमें निषाद के उपयोग से
 करुणा का भाव भी निष्पन्न होता है। 
थाट  पूर्वी  
 जाति    शाडव - संपूर्ण 
वादी प  
संवादी     रे॒  
आरोह      ऩि रे॒ ग म॑ ध॒ नि रें॒ सां  
 अवरोह    रें॒ नि ध॒ प म॑ ग म॑ रे॒ ग रे॒ सा  
पकड  नि रे॒ ग,म॑ प,ध़॒ प,म॑ ग,म॑ रे ग,रे सा
Kitane Dino Ke Baad Ye Aai Sajana Rat Milan Ki
Film - Aaye Milan ki Raat

Meri Saanson Ko Jo Mahaka Rahi Hai
Film - Badalte Rishtey

Tumne Kya Kya Kiya Hai Hamare Liye
Film - Prem Geet
 राग नंद
Time  10 PM TO MIDNIGHT
 राग नंद
  राग नंद कल्याण थाट का रात्रि में
गाया जानेवाला राग है।
यह एक आनंदपूर्ण राग है,
लेकिन इसमें उन्मुक्तता नहीं है।
यह सुंदर राग संगीत संबंधी उच्चतम संकल्पना,
सांगितिक गणना और सौंदर्य की आवश्यकता के
अद्भुत संयोजन का परिणाम है।
कल्याण थाट से व्युत्पन्न राग नंद
की स्वाभाविक गति धीमी से मध्यम है।   
थाट    कल्याण 
 जाति   शाडव - संपूर्ण  
वादी सा 
संवादी प
आरोह   सा ग म प ध नि, प ध म॑ प सां 
अवरोह  सां नि ध प , 
 प ध नि प ध म॑ प ग म ध प (ग) रे सा
पकड    ग म प ध नि प ध म॑ प ग म ध प रे सा
Tu Jahan Jahan Chalega
Film - Mera Saaya

Suno Sajna Papihe Ne
Film - Aaye Din Bahaar Ke

Tuesday, June 2, 2026

राग तिलक कमोद
Time  6 PM TO 8 PM
तिलक कमोद
राग तिलक कमोद खमाज थाट का एक
 संध्या में गाया जाने वाला राग है। यह 
राग स्पष्ट रूप से अनेक विभिन्न भावों
 की अभिव्यक्ति को सक्षम है।
 कुछ पंडितों की मान्यतानुसार,
 इस राग का आविर्भाव उत्तरी 
भारत के लोक गीतों से हुआ था
 और इसे १८वीं शताब्दी में 
संगीतज्ञोंने कला के रूप में 
अपनाया था। यह राग सुगम 
संगीत की अनेक रचनाओं
 का आधार है। 
थाट    खमाज 
जाति शाडव - संपूर्ण
वादी   सा
संवादी  प
आरोह   सा रे म प नि सां
अवरोह  सां प नि॒ ध प ध म ग सा रे ग रे सा
पकड  प ऩि सा रे ग सा रे प म ग रे सा |
प ध म प सां प   
 
filmi song
1 teri yaad dil se bhulane chala hun.
2 hamnew tumko pyar kiya he jitna.
3 Vafa Jinse Ki Bevafaa Ho Gai
        
राग तिलंग
Time 6 PM TO 8 PM
राग तिलंग
राग तिलंग खमाज थाट का एक संध्या
 में गाया जाने वाला राग है। रागमाला
 में यह राग हिंडोल की रागिणी के रूप 
में शामिल है, और यह खमाज थाट का
 राग है। इस्लामिक सूफी परंपरा के 
साथ साथ ठुमरी और गज़ल जैसी 
आधुनिक गायन शैलियों में भी राग 
तिलंग का बहुत उपयोग किया जाता है।
 इसका मिजाज़ नज़ाकत से भरा, 
थोड़ा सा रूमानी है, लेकिन उसमें
 चाह भी है। इस राग को सामान्यतः
 मध्य सप्तक में गाया जाता है, 
परंतु यह तीनों सप्तक में गाने के
 लिए पूरी तरह से उपयुक्त है।  
थाट खमाज 
जाति औडव - औडव
वादी     ग
संवादी  नि        
आरोह  सा ग म प नि सां  
अवरोह सां नि॒ प म ग सा 
पकड   म प नि सां नि॒ प ग म ग सा    
Filmi song

1 chup gye sare najare hay kya..

2 meri kahani bhulne vale tera janha..

3 rahte the kabhi jinke dil me..
राग शंकरा
Time    10 PM TO MIDNIGHT 
राग शंकरा

 राग शंकरा बिलावल थाट का रात्रि में गाया जाने वाला राग है। रात के तीसरे प्रहर में गाया जाने वाला शंकारा संतोष का राग है, जिसमें अन्य सभी बातें के प्रति एक लापरवाही है। यह शिव के नृत्य की स्वरांकित अभिव्यक्ति है।

थाट: बिलावल
जाति: औडव - षाडव
वादी: ग
संवादी: नि
आरोह: सा ग प नि ध सां
अवरोह: सा नि (ध) प ग प रे ग (रे) सा
पकड: सा ऩि प़ ऩि ध़ सा ग प ग रे सां
Bemuravvata Bewafa Begana A Dil Aap Hein
राग शुद्ध कल्याण 
Time   6 PM TO 8 PM
राग शुद्ध कल्याण 

राग शुद्ध कल्याण कल्याण थाट का संध्या में गाया जाने वाला राग है। उसके लावण्य और कौशल्य के साथ, शुद्ध कल्याण प्रेम और आरज़ू की एक ऐसी अभिव्यक्ति है, जिसे हिंदी फिल्मों ने बहुत प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।

थाट: कल्याण
जाति: औडव - संपूर्ण
वादी: ग
संवादी: ध
आरोह: सा रे ग प ध सां
अवरोह: सा नि ध प, प म॑ ग रे सा
पकड: सा (ऩि) ध़ प़, ध़ सा, रे ग प (म॑) ग, प (ग) रे सा

Jahaan Daal Daal Par Sone Ki Chidiyaan Karti Hain 

Rasika Balma haye, Dil Kyo Lagaya

राग सोहनी
Time  MIDNIGHT TO 4 AM 
राग सोहनी

राग सोहनी मारवा थाट का देर रात को गाया जाने वाला राग है। यह संगीतकार के स्व का प्रतिनिधि होता है, जो कि बाह्य स्वप्नवत् स्थिति में भी सचेत रहता है।

थाट: मारवा
जाति: औडव - षाडव
वादी: ध
संवादी: ग
आरोह: सा ग म॑ ध नि सां
अवरोह: सां नि ध म॑ ध ग म॑ ग रे॒ सा
पकड: म॑ ध नि सा रें॒ सा, सा नि ध म॑ ध ग
Kuhu Kuhu Bole Koyaliya
Film - Suvarna Sundari

 

           
राग सारंग
Time NOON TO 2 PM
राग सारंग
 राग सारंग दोपहर में गाया जानेवाला
 राग है। यह राग सारंग रंगांग परिवार
 का मूल जनक राग है, और उसे उसका
 नाम उत्तर प्रदेश स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि 
बृन्दावन से प्राप्त हुआ है। राग बृन्दावनी
 सारंग को सुंदरता और प्रेम की 
अभिव्यक्ति का एक अधिक परिपक्व
 स्वरूप माना जाता है।  
थाट  काफी  
जाति औडव-औडव
वादी  रे   
संवादी  प
आरोह  सा रे म प नि सां 
अवरोह सा नि॒ प म रे म रे सा ऩि सा 
पकड  नि॒ प म रे, म रे ऩि सा  
filmi song 
1 aa lout ke aaja mere meet.

There actually is no single rag known as Sarang.  Sarang is a class of rags which include variations such as Brindavani Sarang, Madhmad Sarang, Shuddha Sarang and a host of others.  Very often when a musician says that they are playing or singing sarang, it is actually Brindavani Sarang.


 राग शिवरंजनी
Time  6 pm to 8 pm
राग शिवरंजनी
 राग शिवरंजनी काफी थाट का
रात्रि में गाया जाने वाला राग है।
यह करूण रस का राग है, जिसे
अनेक विभिन्न रूपों में प्रस्तुत
किया जा सकता है। मूल रूप
से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत
के इस राग को कार्नाटिक
संगीत परंपरा में भी अपनाया गया है।
थाट  काफी
जाति औडव - औडव 
वादी   रे  
संवादी ध  
आरोह सा रे ग॒ प ध सां  
अवरोह सां ध प ग॒ रे सा 
पकड ------