राग काफी
| Time | 6 PM TO 8 PM |
|---|---|
| राग काफी | राग काफी स्वयं पर नामित थाट का एक संध्या में गाया जाने वाला राग है। काफी को मुख्य रूप से ‘सुगम’ संगीत के लिए उपयुक्त राग माना जाता है। पचास से अधिक रागों का मूल काफी थाट में पाया जा सकता है। इसे भारत की अनेक लोक संगीत परंपराओं में भी पाया जा सकता है, जिससे ज्ञात होता है कि यह राग संगीत की शिक्षा से वंचित लोगों के लिए भी उतना ही आकर्षक है। इसे सर्वाधिक परिवर्तनक्षम रागों में से एक माना जाता है। जहाँ तक राग के मिजाज की बात है, तो यह हल्के भोलेपन से ले कर आनंदित श्रृंगारिकता तक विस्तृत है। इसमें मानव मन की अनेक स्थितियों को शामिल कर लिया गया है, और हर रूप में यह आनंददायक ही है! |
| थाट | काफी |
| जाति | संपूर्ण - संपूर्ण |
| वादी | प |
| संवादी | रे |
| आरोह | सा रे ग॒ म प ध नि॒ सां |
| अवरोह | सा नि॒ ध प ध म ग॒ रे सा |
| पकड | सा रे रे ग॒ म प म प म प ग॒ रे |
Hamari Sansoo Me Aaj Tak Woh Hina Kis Kushboo
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