राग गारा
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| राग गारा | राग गारा खमाज थाट का एक रात्रि में गाया जाने वाला राग है। राग गारा स्पष्ट रूप से लोक-संगीत से जन्मी परंपरा का एक हिस्सा है। इसने ठुमरी के माध्यम से शास्त्रीय संगीत के फलक पर स्वयं के लिए स्थान बनाया। राग गारा कलाकार को इतनी स्वतंत्रता देता है, कि उसके विस्तार की व्याख्या करना बहुत मुश्किल है। इस राग के ढाँचे की रूप रेखा इसे मध्य और द्रुत दोनों गति में गायनक्षम बनाती है। गारा का उपयोग करने वाला संगीत स्वरूप भावनाप्रधान प्रस्तुति के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है, परंतु इसका मुख्य रंग दुःख अथवा उदासी का नहीं है। यह राग काफी आनंददायक और शांत प्रसन्नता से सभर है। इसे योग्य रूप से किसी भी समय के लिए उपयुक्त राग माना जाता है। गायक और वाद्य संगीतकार दोनों ही के लिए इसका सुहानापन सदा ही आकर्षण का कारण बना है। |
| थाट | खमाज |
| जाति | शाडव - संपूर्ण |
| वादी | ग |
| संवादी | नि |
| आरोह | सा ग म प ध नि सां |
| अवरोह | सां नि॒ ध प म ग रे ग॒ रे सा |
| पकड | सा ग म प , ग म रे ग॒ सा रे ऩि सा , ऩि॒ ध़ ऩि सा |
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