Tuesday, June 2, 2026

 राग मियां की मल्हार
Time  MIDNIGHT TO 4 AM 
 राग मियां की मल्हार

 राग मियां की मल्हार काफी थाट का एक देर रात में गाया जाने वाला राग है। मियां की मलहार वर्षा ऋतु का राग है, और इसका उपयोग सावन के आह्वान और उसे पृथ्वी को भीगो देने का निमंत्रण देने को किया जाता है। बादशाह अकबर के दरबार के नौ रत्नों में से एक मियां तानसेनने मलहार के इस स्वरूप की रचना की थी। यह राग वर्षा को जीवन को पुनः यौवन प्रदान करने के लिए प्रार्थना है। माना जाता है कि मियां तानसेन के संगीत में ऐसी क्षमता थी कि उनके संगीत की शक्ति से वर्षा हो पाती थी। किसी गायक के पौरूषेय कंठ में गायकी और सरोद पर इस राग का बजाया जाना, इस राग का श्रेष्ठ स्वरूप है। हालाँकि इसे अधिकतर मध्यरात्रि में गाया जाता है, वर्षा ऋतु के दौरान इसे कभी भी गाया जा सकता है।

थाट: काफी
जाति: शाडव - संपूर्ण
वादी: रे
संवादी:
आरोह: सा म रे प म प नि॒ नि सा
अवरोह: सा ध नि॒ प म प (म) ग॒ म रे सा
पकड: रे प ग॒ म रे सा, ऩि॒ ध़ ऩि सा
Bole Re Papihara, Papihara
Film - Guddi