| दीपचंदी ताल का परिचय दीपचंदी ताल भारतीय संगीत की एक प्रमुख ताल है, जिसका प्रयोग मुख्य रूप से उपशास्त्रीय और सुगम संगीत में किया जाता है। यह एक भावपूर्ण और चंचल ताल है, जिसे 'होरी का ताल' या 'चंचार ताल' भी कहा जाता है। भारतीय संगीत में इस ताल का परिचय निम्नलिखित है: ताल का ढांचा और विभाग मात्राएं (Beats): 14 मात्राएं विभाग (Vibhag): 4 विभाग (3, 4, 3 और 4 मात्राओं के) ताली (Clap): पहली, चौथी और 11वीं मात्रा पर ताली खाली (Wave): आठवीं मात्रा पर खाली होती है ताल के बोल (ठेका) तबले या ढोलक पर इस ताल को बजाने के लिए निम्नलिखित बोलों का प्रयोग किया जाता है: विभाग 1: धा - धिन - आ (3 मात्रा) विभाग 2: धा - धा - तिन - आ (4 मात्रा) विभाग 3: ता - तिन - आ (3 मात्रा) विभाग 4: धा - धा - धिन - आ (4 मात्रा) आसान बोल: धा धिन आ | धा धा तिन आ | ता तिन आ | धा धा धिन आ प्रमुख विशेषताएं और उपयोग लय: यह ताल आमतौर पर मध्यम लय (Medium Tempo) में बजाई जाती है। उपयोग: इसका सबसे अधिक प्रयोग ठुमरी, गजल, भजन, होरी, कव्वाली और फिल्मी गीतों में किया जाता है। सौंदर्य: यह ताल गीतों में ठहराव और माधुर्य (Melody) लाने के लिए बेहतरीन मानी जाती है। |
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"दीपचंदी ताल पर आधारित फ़िल्मी गीत "आज दिल पे कोई जोर चलता नहीं।हमने चाहा मगर कह ना पाए। कैसे जियूँगा मैं अगर तू न बनी मेरी सायबा। अजी रूठ कर अब कँहा जाईयेगा। चन्दन का पलना रेशम की डोरी। हुश्न पहाड़ों का ओ सायबा। इशारों इशारों में दिल लेने वाले। नीला आसमां सो गया। पिया तो से नैना लागे रे। |
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